पुलिस अफसरों से बोले शिवराज आखिर थानों पर आपकी निगाहें क्यों नहीं जाती, अभी भी जिंदा है कमलनाथ की उम्मीदें, निगम मंडल में भी दिखेगा सिंधिया का दबदबा

  • Sep 01,2021 09:02 am

राजवाड़ा 2 रेसीडेंसी

अरविंद तिवारी

बात यहां से शुरू करते हैं

 • पुलिस को अपराधियों के लिए वज्र से भी कठोर होने कि हिदायत देने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब इंदौर में मालवा निमाड़ की कानून व्यवस्था की समीक्षा में बाकी मुद्दों पर संतोष जताते हुए एक सवाल उठाया। ‌ उन्होंने बैठक में मौजूद इंदौर उज्जैन रेंज के आला पुलिस अफसरों से पूछा कि आखिर थानों पर आपकी निगाहें क्यों नहीं जाती है। ‌ यहां होने वाले लेन देन को हम क्यों नहीं रोक पाते हैं। ‌अफसर कुछ बोलते इसके पहले ही मुख्यमंत्री ने कहा थानों पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। जनता का पहला वास्ता ही थाने से पड़ता है और यदि वहां हम उसे संतुष्ट नहीं कर पाते हैं तो फिर इसका असर सीधे पुलिस की छवि पर पड़ता है। उनका सीधा आशय यह था कि सबसे पहले थानों का भ्रष्टाचार बंद होना चाहिए। ‌

 • वक्त की नजाकत को देखते हुए दीपक जोशी बैकफुट पर आ गए, अर्चना चिटनिस को भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता बना दिया गया, कृष्ण मुरारी मोघे अभी भी पीछे हटने को तैयार नहीं है और हर्षवर्धन चौहान मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद आश्वस्त है। इस सब के बावजूद मंत्री विजय शाह तो यह मानकर चल रहे हैं कि दावेदारों के बीच जो खींचतान चल रही है उसका फायदा खंडवा संसदीय क्षेत्र में उनकी पत्नी खंडवा की पूर्व महापौर भावना शाह को मिल सकता है। ‌ शाह ने यहां से अपनी पत्नी की उम्मीदवारी तय करवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है और उन्हें पूरा भरोसा है कि आखरी में फैसला भावना के पक्ष में ही होगा। मंत्री जी को थोड़ा भरोसा तंत्र मंत्र पर भी है। 

 • कमलनाथ के पास जो फीडबैक है और उनके सर्वे तो यही कह रहा है कि जोबट और पृथ्वीपुर सीट कांग्रेस के पास ही बरकरार रहेगी, रेगांव में यदि आज की स्थिति पर गौर करें तो कॉन्ग्रेस भाजपा की तुलना में बेहतर स्थिति में है और खंडवा में यदि कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ ली तो यहां भी भाजपा की राह में मुश्किलें खड़ी की जा सकती है। इस सब ने हीं उम्र के 7 दशक देख चुके कांग्रेस के इस बुजुर्ग नेता की उम्मीदों को जिंदा रख रखा है। साहब अपनी नई टीम के दम पर एक बार फिर किला फतह करना चाहते हैं और जो लोग साथ खड़े हैं उनका भी मानना है कि साहब को मध्यप्रदेश में एक मौका तो और मिलेगा। ‌

 • भाजपा के भी कई कद्दावर नेता अब यह मानने लगे हैं कि जिस तरह का रिस्पांस पार्टी का शीर्ष और प्रदेश नेतृत्व ज्योतिरादित्य सिंधिया को दे रहा है उसके चलते निकट भविष्य में होने वाली निगम मंडलों की नियुक्ति में उन्हें तो मौका मिलना मुश्किल है। ‌ यह तय है कि विधानसभा उपचुनाव में हारने वाले सिंधिया समर्थक छह नेताओं के अलावा दो वर्तमान विधायकों को महत्वपूर्ण निगम मंडल में मौका मिलना है। इसके बाद जो निगम मंडल बच रहे हैं उनमें शिवराज सिंह चौहान और वी डी शर्मा की पसंद को तवज्जो मिलना है। इस सब के बाद जो निगम मंडल बचेंगे उनमें भाजपा के बड़े नेताओं की कोई रुचि नहीं है। ऐसा क्यों यह तो आप समझ ही रहे होंगे।

 • इंदौर की महापौर रह चुकी हैं और तीन बार के विधायक मालिनी गौड़ ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह इस तरह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निशाने पर आ जाएंगी। कोरोना की वैक्सीन के मामले में लोगों को जागरूक करने तथा इंदौर की जनता के प्रति आभार जताने के लिए जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इंदौर आए तब गौड़ ने कई जगह मंच लगवा कर उनका स्वागत करवा दिया। सामान्यतः शांत रहने वाले मुख्यमंत्री ने जब एक मंच का नजारा देखा तो उनकी भृकुटी तन गई और उन्होंने मौके पर ही अपनी नाराजगी दर्शा दी। बाद में मंच से उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इसके लिए माफी मांगी और कहा कि अब किसी मंच से स्वागत नहीं स्वीकारेंगे। हालांकि मुख्यमंत्री की इस घोषणा के पीछे भी कोई राज तो है। ‌

 • सत्ता के दौर में सेवानिवृत्त आईएएस अफसर डी एस राय कांग्रेस द्वारा भुला दिए गए थे। न सरकार ना ही संगठन ने उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी थी। ‌ लेकिन अब जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस फिर सत्ता में वापसी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है और अभी से तैयारी शुरू कर दी है राय ने फिर मोर्चा संभाल लिया है। ‌ पिछले दिनों उन्होंने भोपाल में आदिवासियों का एक सम्मेलन आयोजित किया और इसकी सदारत कमलनाथ से करवाई। ‌ इस सम्मेलन में आदिवासी क्षेत्रों के लिए कांग्रेस की रणनीति पर विचार हुआ और निष्कर्ष पूरे प्रदेश में आदिवासी अधिकार यात्रा निकालने जैसी कई रणनीति के रूप में सामने आया। देखते हैं आने वाले समय में राय की राय को कितना महत्व मिलता है।

 • 2018 के चुनाव में इंदौर के पांच नंबर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट पाने में विफल रहे डॉ आनंद राय की निगाहें अब महू सीट पर है। यहां कांग्रेस के सबसे मजबूत नेता अंतर सिंह दरबार 3 चुनाव हार चुके हैं बाकी जो दावेदार हैं उनकी हालत किसी से छुपी हुई नहीं है। ‌ महू विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी मतों की संख्या अच्छी खासी है और गैर आदिवासी होते हुए भी राय यह मानते हैं कि यदि वह मुकाबले में होंगे तो बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों का उन्हें समर्थन मिलेगा। ‌ यह राय की दूर दृष्टि का ही नतीजा है की जयस ने इस क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और फिलहाल इस संगठन ने यहां से विधायक प्रदेश की मंत्री उषा ठाकुर को निशाने पर ले रखा है। वैसे दरबार इतनी आसानी से हाथ टेकने वाले नेता नहीं है। 

• इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर इंदौर के कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा था कि इंदौर में एसडीपीआई और पी एफ आई से जुड़े लोग राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त है। मध्य प्रदेश के डीजीपी विवेक जौहरी ने इसके 3 दिन बाद इंदौर में ही से नकार दिया और बोले कलेक्टर ने किस आधार पर यह बोला यह वही बता पाएंगे। ‌ आखिर ऐसा विरोधाभास क्यों। हालांकि कलेक्टर ऐसे लोगों को चिन्हित करने के बाद पुलिस प्रतिवेदन के आधार पर ही उन्हें जिला बदर करने की तैयारी में है। प्रदेश के गृहमंत्री और इंदौर के प्रभारी डॉ नरोत्तम मिश्रा जरूर कलेक्टर की बात से सहमत नजर आ रहे हैं ‌ 

चलते चलते

अपनी संस्था सानंद के माध्यम से पूरे देश में कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाने वाले जयंत  भिसे आखिरकार उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत अकादमी के निदेशक बन ही गए। दरअसल संघ और संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर की इच्छा तो भिसे को भारत भवन में किसी अहम भूमिका में काबिज करने की थी लेकिन फिलहाल मामला संगीत अकादमी पर आकर रुक गया है। देखिए आगे क्या होता है। वैसे मंजिल कुछ और है यह तो एक मुकाम है।

पुछल्ला

उज्जैन रेंज के वह कौन से एसपी हैं जिनकी शराब खोरी की आदत न केवल मातहतो के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है बल्कि उनकी पत्नी भी इससे बहुत खफा है और नौबत तलाक की भी आ रही है। ‌

अब बात मीडिया की

- दैनिक भास्कर ने अपने तीन संपादकों के दायित्वों में फेरबदल किया है। खंडवा के संपादक आशीष चौहान अब भोपाल में यूपीसी हेड के रूप में अहम भूमिका निभाएंगे। राजीव शर्मा खंडवा संस्करण के नए संपादक होंगे। ‌

- नईदुनिया इंदौर के स्थानीय संपादक कौशल किशोर शुक्ला परेशानी में आ गए हैं। मार्केटिंग टीम के अनुराग जोशी से हुए विवाद के बाद पहले उन्हें 5 दिन की छुट्टी पर भेजा गया और अब स्टेट डेस्क पर तैनात किया गया है। 

- हिंदुस्तान टाइम्स में लंबी पारी खेलने के बाद वरिष्ठ पत्रकार रंजन श्रीवास्तव अब फ्री प्रेस के भोपाल ब्यूरो चीफ हो गए है।‌

- कोरोना की दूसरी लहर के बाद जब यह माना जा रहा था कि अखबारों में इस बार भी इंक्रीमेंट शायद ही हो दैनिक भास्कर और नई दुनिया ने अपने संपादकीय साथियों को अच्छा इंक्रीमेंट दिया।

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